श्री प्रेमानंद महाराज की जीवनी

श्री प्रेमानंद जी महाराज कौन है?

श्री प्रेमानंद महाराज जी का नाम राधा रानी के परम भक्तों में से एक हैं. जो भक्त इनके सतसंग को मन लगाकर सुनता है उन्हें अवश्य ही राधारानी के दर्शन हो जाते हैं. परम पूज्य प्रेमानंद माहाराज जी का जन्म कानपुर के एक गांव सरसों में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था. महाराज जी का नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे था. इनके पिता और दादा दोनों की सन्यासी थे. इनकी मां धर्म परायण थी. इनके माता-पिता साधु-संतों की सेवा करते थे और आदर सत्कार भी करते थे.

कुछ समय में ही महाराज ने आधात्यम का रास्ता चुन लिया और श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी का जप करना शुरू कर दिया. इसी के साथ उन्होने अपना घर त्याग दिया.ऐसा माना जाता है कि भोलेनाथ ने स्वंय प्रेमानंद जी को दर्शन दिए और उसके बाद वो वृंदावन आए।

श्री प्रेमानंद जी महाराज का जीवन परिचय: घर का माहौल आध्‍यात्‍मिक होने की वजह से प्रेमानंद जी महाराज ने कम उम्र से चालीसा का पाठ पड़ना शुरू कर दिया था उनके माता – पिता हमेशा संत सेवा और अनेक सेवा में लगे रहते थे उनके बड़े भाई ने श्रीमद्भागवतम के श्लोक पढ़कर परिवार को आगे बढ़ाया।

जब प्रेमानंद महाराज 5 वीं कक्षा में थे तब उन्होंने गीता, श्री सुखसागर पढ़ना शुरू किया। स्कूल में पढ़ाई के दौरान उनके मन में बहुत सारे सवाल उठते थे उत्तर निकालने के लिए उन्होंने श्री राम और श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी का जाप किया।

जब वे 9 वी कक्षा में आये तब उन्होंने ईश्वर की खोज करने के लिए आध्यात्मिक जीवन जीने का दृढ़ निश्चय कर लिया था। उसके लिए वे सब कुछ त्यागने को तैयार थे, उन्होंने अपनी माँ को अपने निर्णय के बारें में बताया।

श्री प्रेमानंद जी महाराज का ब्रह्मचारी जीवन : 13 वर्ष की उम्र में घर छोड़ने के बाद महाराज जी को नैष्ठिक ब्रह्मचर्य में दीक्षित किया गया था उनका नाम बदल कर आनंदस्वरूप ब्रह्मचारी नाम रखा। उनके बाद उन्होंने सन्यास स्वीकार कर दिया था महावाक्य को स्वीकार करने पर उनका नाम स्वामी आनंदाश्रम रखा गया।
       ईश्वर को पाने के लिए कठिन तपस्या की और ठान लिया की तब से उनका सारा जीवन भगवान् की भक्ति में समर्पित हो गया है। अब वे अपना ज्यादा समय अकेले में बिताना पसंद करते है।

श्री प्रेमानंद जी महाराज वृंदावन वाले महाराज के नाम से भी जाने जाते हैं : एक दिन वे बनारस में एक पेड़ के नीचे ध्यान कर रहे थे। तभी वे श्री श्यामाश्याम की कृपा से वे वृंदावन की महिमा के प्रति आकर्षित हुए। बाद में उन्होंने एक रास लीला में भाग लिया। उनकी दिनचर्या सुबह के समय श्री चैतन्य महाप्रभु की लीला और रात में श्री श्यामाश्याम की रास लीला देखना था एक महीने के अंदर ही वे लीला में इतने मग्न और आकर्षित हो गए कि वह उनके बिना अपने जीवन जीने की कल्पना भी नहीं कर पा रहे थे।
       श्री प्रेमानंद जी महाराज कुछ समय के बाद स्वामी जी की सलाह से और श्री नारायण दास भक्तमाली के एक शिष्य की मदद से मधुरा जाने को तैयार हो गए । महाराज जी वृन्दावन में किसी को नहीं जानते थे महाराज जी वृन्दावन रहने लगे।
       वृन्दावन में एक आध्यत्मिक संगठन है इस संगठन की स्थापना प्रेमानंद महाराज जी के द्वारा हुई है महाराज जी का मुख्य उद्देस्य था वृन्दावन में विभिन्न धार्मिक कार्यो को करना और उनके माध्यम से प्रेम और शांति को फैलाना।
       ये लोगो के मन और हृदय को खुशी और शांति प्राप्त करने के लिए प्रभु का ध्यान, योग और अन्य आध्यात्मिक अभ्यासों को करने की सलाह देते है महाराज जी ये सभी सेवाय नि:शुल्क प्रदान करते है।

श्री प्रेमानंद जी महाराज क्यों प्रसिद्ध है?

श्री प्रेमानंद जी महाराज अपनी श्रीकृष्ण भक्ति के लिए प्रसिद्ध है इसके साथ ही वह हर पल राधा रानी के नाम का स्मरण करते हैं श्री प्रेमानंद जी महाराज अपने प्रवचन के दौरान और अपनी निजी आध्यात्मिक जीवन में भी श्री कृष्ण और राधा जी से बहुत प्रेरित है और जग का कल्याण हेतु लोगों को भी सन्मार्ग से अवगत कराते हैं।

श्री प्रेमानंद जी महाराज लोगों को क्या उपदेश देते हैं?

श्री प्रेमानंद जी महाराज सभी लोगों को राधा कृष्ण की भक्ति से जुड़ने के लिए प्रेरित करते हैं । श्री प्रेमानंद जी महाराज लोगों को उपदेश देते हैं कि ईश्वर में सदैव विश्वास रखना चाहिए ,कभी भी किसी का दिल नहीं दुखाना चाहिए , किसी से झूठ नहीं बोलना चाहिए , लोगों का मजाक नहीं उड़ाना चाहिए और अपने स्वास्थ्य पर भरपूर ध्यान देना चाहिए।

श्री प्रेमानंद जी महाराज का वर्तमान पता : वर्तमान समय में प्रेमानंद जी महाराज वृंदावन के आश्रम में रह रहे है उनका नंबर सार्वजनिक नहीं किया हुआ है अगर आप उनके दर्शन करना चाहते है तो इस पता पर संपर्क करें– श्री हित राधा केली कुन्ज, वृन्दावन परिकर्मा मार्ग, वराह घाट, वृन्दावन, उत्तर प्रदेश, वृंदावन- 281121 .

इस पते पर जाकर महाराज जी के दर्शन कर सकते है।