यूनीफॉर्म सिविल कोड को लेकर पूरे देश में बहस हो रही है। कोई इसका समर्थन कर रहा है तो कुछ लोग इसका विरोध कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर लोग खुलकर अपनी राय रख रहे हैं। इसी बीच मशहूर कथावाचक और मोटिवेशनल स्पीकर जया किशोरी ने UCC पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) पर क्या बोली मशहूर कथा वाचक जया किशोरी जी (Famous storyteller Jaya Kishori):
यूनिफॉर्म सिविल कोड पर अपना बयान देते हुए कथावाचक जया किशोरी जी ने कहा कि जो भी काम देश हित में हो अच्छा हो , शांति से हो, देश को आगे बढ़ाने के लिए वह काम जरूर होना चाहिए। उन्होंने अपने बयान के अंत में यह भी कहा कि यह सभी काम कानून के दायरे में होने चाहिए।
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) क्या है ?
यूनिफॉर्म सिविल कोड एक सामाजिक मामलों से संबंधित कानून होता है जो सभी पंथ के लोगों के लिये विवाह, तलाक, विरासत व बच्चा गोद लेने आदि में समान रूप से लागू होता है। दूसरे शब्दों में, अलग-अलग पंथों के लिये अलग-अलग सिविल कानून न होना ही ‘समान नागरिक संहिता’ की मूल भावना है।
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के फायदे क्या है ?
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू होने से सभी क्रिमिनल लॉ समान रूप से लागू हो पाएंगे और देश की न्याय प्रणाली में होने वाला विरोधाभाष दूर होगा।
यदि यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू किया जाता है, तो यह विवाह के लिए न्यूनतम कानूनी उम्र तय करने, द्विविवाह को खत्म करने और अंतर-धार्मिक विवाह से जुड़े मुद्दों को हल करने में सक्षम होगा।
देश में किसी भी धर्म, जाति, वर्ग के नागरिकों के अधिकार का हनन होने से रोका जाएगा।
देश की महिलाओं को यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होने से समान नागरिक अधिकार दिया जाएगा।
माना जा रहा है कि यूसीसी में महिलाओं को समान अधिकार दिए जाने पर फैसला हो सकता है। इसके तहत हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई समेत किसी भी धर्म से ताल्लुक रखने वाली महिला को परिवार और माता पिता की संपत्ति में समान अधिकार मिलेगा।
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के नुकसान क्या है ?
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के खिलाफ मुख्य तर्क यह है कि यह पसंद के धर्म का पालन करने की संवैधानिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है जो धार्मिक समुदायों को अपने संबंधित व्यक्तिगत कानूनों का पालन करने की अनुमति देता है।
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) का विरोध क्यों हो रहा है ?
मुस्लिम पर्सनल लाॅ बोर्ड (muslim personal law board) खुले तौर पर यूनिफार्म सिविल कोड का विरोध कर रहा है। उसके प्रतिनिधि साफ कर चुके हैं कि उन्हें यूनिफार्म सिविल कोड मंजूर नहीं है। इससे उन्हें लगता है कि उनके ऊपर हिंदू सिविल लाॅ (Hindu civil law) के नियम थोप दिए जाएंगे।
इसके अतिरिक्त अन्य विपक्षी पार्टियां भाजपा पर संप्रदाय एवं वोट बैंक की राजनीति का आरोप लगाते हुए इसका विरोध कर रही हैं। उस पर बहुसंख्यकवाद को बढ़ावा देने का भी आरोप लग रहा है।
उनका मानना है कि यह प्रस्ताव भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25, जो किसी भी धर्म को मानने एवं प्रचार की स्वतंत्रता का हक देता है, के खिलाफ है। इसे वे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 में दी गई समानता की अवधारणा के भी खिलाफ बताते हैं।
यूनिफॉर्म सिविल कोड भारत के किस राज्य में लागू (applicable) है ?
यूनिफॉर्म सिविल कोड की बात करें तो वर्तमान स्थिति में भारत देश के गोवा राज्य में यह कोड लागू है।
भारत को यूनिफॉर्म सिविल कोड की आवश्यकता क्यों ?
भारत में यूनिफॉर्म सिविल कोड के कार्यान्वयन का उद्देश्य कानूनी एकरूपता सुनिश्चित करना होगा, न कि सांस्कृतिक या धार्मिक अनुरूपता लागू करना । यह कानून के तहत सभी नागरिकों के लिए समान अधिकारों को बनाए रखने की अनिवार्यता के साथ अपनी व्यक्तिगत मान्यताओं का पालन करने के व्यक्तियों के अधिकारों को संतुलित करने का एक प्रयास है।
फिलहाल समान नागरिक संहिता भारत में नागरिकों के लिए एक समान कानून को बनाने और लागू करने का एक प्रस्ताव है जो सभी नागरिकों पर उनके धर्म, लिंग और यौन अभिरुचि की परवाह किए बिना समान रूप से लागू होगा।