विवाह हिंदू परंपरा का एक हिस्सा है और आज भी ज्यादातर घरों में शादी से पूर्व कुंडली (Horoscope) मिलान किया जाता है। आज भी इस आधुनिक युग में बहुत से परिवार ऐसे भी हैं जो शादी से पहले जन्म कुंडली मिलाने में विश्वास रखते हैं। जन्म कुंडली व्यक्ति के भूत, वर्तमान एवं भविष्य के स्थिति एवं घटनाक्रमों को जानने का एक साधन है। कुंडली आपके जीवन के भाव ग्रह एवं नक्षत्र से बना जीवन वर्णन है।
कुंडली ज्योतिष शास्त्र रुपी दिए कि वह बाती है जिसे जलाकर प्रकाश डाला जाता है। यह आपके आने वाले वैवाहिक जीवन के बारे में एक आकलन प्रदान करता है।
इससे पता चलता है कि शादी के बाद पति-पत्नी खुश रहेंगे या नहीं, उनके आपसी संबंध में ताउम्र चलेंगे या नहीं। इसी तरह के अन्य सवालों के जवाब हमें कुंडली मिलान की मदद से मिलते हैं।
कुंडली में मांगलिक होना क्या होता है (What does it mean to be auspicious in a horoscope?) ?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर कुंडली में मंगल ग्रह प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम और द्वादश भाव में बैठा हो तो यह स्थिति मांगलिक दोष बनाती है। मांगलिक दोष दांपत्य जीवन को प्रभावित करता है। इसकी वजह से के विवाह में देरी और कई तरह की रुकावटें भी आती हैं।
वैदिक ज्योतिष में मंगल देव हमारे रिश्तों पर, मस्तिष्क पर आधिपत्य रखते हैं। नाड़ी ज्योतिष के अनुसार महिला जातक की पत्रिका में मंगल देव पति का प्रतिनिधि करते हैं। प्रत्येक पत्रिका के लिए मंगल की स्थिति बहुत ही महत्वपूर्ण होती है। मंगल अर्थात कुज के द्वारा ही बनता है मंगल दोष। जब भी किसी जातक/जातिका की पत्रिका में मंगल विशेष भावों से जुड़े हों या उस पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहे हैं तो वह कुज दोष से प्रभावित होगा। कुज दोष का सबसे अधिक नकारात्मक प्रभाव विवाह, वैवाहिक जीवन पर पड़ता है। विवाह में बाधा, वैवाहिक जीवन में कलह आदि इसके सामान्य प्रभाव है।
कभी-कभी इसका प्रभाव इतना प्रबल होता है कि वैवाहिक जीवन में विच्छेदन की स्थिति भी आ जाती है। शास्त्रों में ऐसा वर्णित हैं मांगलिक व्यक्ति का विवाह समान भाव मांगलिक व्यक्ति से ही होना उत्तम होता है। जिससे इस दोष का शमन होता है। यदि ऐसा नहीं किया जाता तो समस्याओ का सामना करना पड़ता है।
मंगल दोष (Mangal dosh) के प्रभाव (effect) या नुकसान (disadvantages) क्या क्या होते हैं ?
० जब लग्न में ये स्थिति होती है तो जातक का स्वभाव अत्यधिक तेज, गुस्सैल, और अहंकारी होता है।
० चतुर्थ में मंगल जीवन में सुखों में कमी करता है और पारिवारिक जीवन में कठिनाइयां आती हैं।
० सप्तम भाव में मंगल होने से वैवाहिक सम्बन्धों में कठिनाई आती है।
० अष्टम भाव में स्थित मंगल विवाह के सुख में कमी, ससुराल के सुख में कमी या ससुराल से रिश्ते बिगड़ जाते हैं।
० द्वादश भाव का मंगल वैवाहिक जीवन में कठिनाई, शारीरिक क्षमताओं में कमी, क्षीण आयु, रोग, कलह को जन्म देता है।
इस दोस्त को दूरियां कम करने का उपाय क्या है ?
कुछ सामान्य उपाय करके मांगलिक दोष को थोड़ा नियंत्रित किया जा सकता है या जिन का विवाह मांगलिक से हो गया है वो इन उपायों को कर के कुछ शांति करने का प्रयास कर सकते हैं-
० सबसे बड़ा उपाय इसके लिए है जातक का आत्म नियंत्रण, अहंकार क्रोध पर नियंत्रण।
० इसके अतिरिक्त श्री हनुमान चालीसा का पाठ करें जो पीले कागज़ पर लाल स्याही से लिखी हो प्रतिदिन श्रद्धा से पाठ करें।
० भगवान शिव शक्ति की संयुक्त पूजा करें। शिवलिंग पर लाल रंग के पुष्प अर्पित करें।
० लाल मसूर का मंगलवार को दान करें। गुड़ का दान भी कर सकते हैं।
० मंगलवार को मजदूरों को खाना खिलाएं।
ये कुछ सामान्य उपाय हैं जिन्हे कोई भी जातक/जातिका कर सकते हैं। उज्जैन स्थित मंगलनाथ जी की पूजा अनुष्ठान भी मंगल दोष हेतु की जाती है लेकिन ये तभी करें जब आपकी पत्रिका के अनुसार ज्योतिषी आपको सलाह दें।
मांगलिक दोष के परिहार क्या-क्या है ?
० मंगली दोष स्वतः समाप्त हो जाता है, जब मंगली योगकारक ग्रह अपने स्वराशि, मूल त्रिकोण राशि या उच्च राशि में हो।
० सप्तमेश या शुक्र बलवान हो तथा सप्तम भाव इनसे युत दृष्ट हो तो उस कुंडली में मंगल दोष स्वतः समाप्त हो जाता है।
० वर या कन्या में से किसी एक की कुंडली में मंगली दोष हो और दूसरे की कुंडली में शनि यदि लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में हो तो दोष स्वतः समाप्त हो जाता है।
० बलवान गुरु या शुक्र के लग्न के होने पर या सप्तम में होने पर एवं मंगल के निर्बल होने पर मंगली दोष समाप्त हो जाता है।
० मेष लग्नस्थ मंगल, वृश्चिक राशि में चतुर्थ भावस्थ मंगल वृष राशि मे सप्तम भावस्थ मंगल कुंभ राशि अष्टम भावस्थ मंगल तथा धनु राशि में व्यय भावस्थ मंगल दोष उत्पन्न नहीं करते।
० मंगल शुक्र की राशि में स्थित हो तथा सप्तमेश बलवान होकर केंद्र – त्रिकोण में हो तो मंगली दोष प्रभावहीन हो जाता है।
विवाह (marriage) से पूर्व कुंडली मिलान क्यों आवश्यक है ?
विवाह से पूर्व कुंडली मिलान करना अत्यंत आवश्यक हैं, क्योंकि कुंडली मिलान भावी दूल्हा-दुल्हन की अनुकूलता और उनके सुखी व समृद्ध भविष्य को जानने का एक सटीक साधन है। शादी की चाह रखने वाला प्रत्येक व्यक्ति अपने लिए एक अच्छा जीवनसाथी चाहता है। परंतु कई बार ऐसा देखने में आता है कि शादी के बाद पति-पत्नी के बीच रिश्ते बिगड़ जाते हैं। दोनों के विचार अलग-अलग होने के कारण मतभेद की स्थिति बनती है| और बाद में यह सब उनके बिछड़ने का कारण बन जाते हैं। शादी के बाद वर-वधु का जीवन सुखी रहे इसलिए कुंडली के माध्यम से दोनों के गुण दोषों का मिलान किया जाता है।
विवाह के लिए कुंडली में कितने गुण मिलने चाहिए ?
विवाह के लिए वर और वधु के कम से कम 18 गुणों का मिलना ठीक माना जाता है। कुल 36 गुणों में से 18 से 21 गुण मिलने पर मिलान मध्यम माना जाता है। इससे अधिक गुण मिलने पर उसे शुभ विवाह मिलान कहते हैं। किसी भी वर और वधु का 36 गुण मिलना अत्यंत ही दुर्लभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम और सीता जी के ही 36 गुण मिले थे।
यदि आपकी कुंडली का मिलान 18 गुण से कम यानी 17 गुण होता है, तो विवाह नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा विवाह सुखमय नहीं हो सकता है। इससे बचना चाहिए।
कुंडली में मांगलिक दोष होने पर क्यों ज्यादा महत्व दिया जाता है ?
ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह का काफी महत्व है। ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रहों के सेनापति होने के साथ क्रूर ग्रह के रूप में माना जाता है। इसके साथ ही मंगल ग्रह मेष और वृश्चिक राशि के स्वामी है। मंगल की स्थिति विवाह के समय जरूर देखी जाती है। जब कुंडली में मंगल लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम और द्वादश भाव में से किसी भी भाव में होता है तो यह मांगलिक दोष कहलाता है। मांगलिक दोष वाले जातक का विवाह किसी मांगलिक दोष वाले लड़का या फिर लड़की से होता है। अगर आपकी कुंडली में भी मंगल दोष है, तो ज्योतिष संबंधी इन उपायों के अपना सकते हैं। इससे लाभ मिलेगा।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मंगल का शादी विवाह से काफी कनेक्शन है। जब किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल की स्थिति कमजोर होती है तो वह मांगलिक होता है। ऐसे में अगर गैर मांगलिक लड़का या लड़की से विवाह करा दिया जाए, तो वैवाहिक जीवन में कई परेशानियां आती हैं। कई बार क्लेश इतना ज्यादा बढ़ जाता है कि जीवनसाथी से अलगाव हो जाता है।
FAQ
क्या शादी से पहले कुंडली मिलाना आवश्यक है ?
उत्तर: यदि आप कुंडली में विश्वास रखते हैं और आप अपने वैवाहिक जीवन के बारे में जानना चाहते हो तो कुंडली मिलान जरूरी है।
क्या मांगलिक दोष वाले से शादी नहीं करनी चाहिए ?
उत्तर: यदि ज्योतिष शास्त्र के सहायता से उनका मांगलिक दोष दूर किया जा सकता हो तो शादी कर सकते हैं।
कुंडली मिलान कौन करता है ?
उत्तर: जिनको ज्योतिष शास्त्र का ज्ञान हो वह कुंडली मिलान कर सकते हैं |
विवाह के लिए कुंडली में कम से कम कितने गुण मिलने चाहिए ?
उत्तर: विवाह के लिए कुंडली में कम से कम 18 से 21 गुण मिलने चाहिए।